Saturday, August 10, 2013

पानी, आग और आसमान में डूबे रंग..

कैसे कोई घुले रंगों की नम, उनींदी नीली-नारंगी दुनिया की तस्‍वीरें खींच लाता है, बच्‍चों-सी शैतानियां करता हमें मुंह बिराता है, या अपनी-अपनों में खोया निस्‍संग लापरवाही में समय-सारों को महज़ अपनी पीठ दिखाता है? मुंह पर हाथ धरे मैं सोचता पलटकर फिर ब्‍लॉग देखता हूं..

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bou bou bou

2 comments:

  1. गजब का खूबसूरत ब्लॉग है. कैसे रंगों में रंगी तसवीरें. एकबारगी तो लगा कि डिजिटल फोटोग्राफी के पहले की होंगी मगर फिर एक जगह आईफोन का मॉडल देखा तो समझी कि स्पेशल इफ़ेक्ट हैं. किसी फिल्म का हिस्सा जैसा है सब. सपनों जैसा कुछ.

    इस सब पर आपका लिखा इंट्रो. एक ठो पोडकास्ट नया चिपका देते लेकिन तो औरो बहुते अच्छा लगता.

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  2. @सही कहती हो, किस-लय कोमारी, मगर ईहौ सच्‍चाई है कि जिस 'पलेटफार्म' पर हम पाडखेलकास्‍टकारी करते थे उसके नवके वर्सन को कायदे से कब्‍बो फिर 'कन्फिगरे' नहीं कर सके, और अब त आलम है कि डेस्‍कटाप का माइक्रोफोनो हमरी पकड़ से बाहिर है. उम्‍मीद का सितारा अइसहीं आपसे छूटके कौनो अउर के ब्‍लाग पर जाके फ्लशलैट फेंकता है!

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