Friday, August 30, 2013

सितम लिखो..

लिखो लिखो.. दौड़ते खड़ा होकर गिरे में घड़े में अड़े में कहीं से कहीं का लिखो.. छूटे जनमों के बलम दिखो, नवम्‍बर की घरबराहट को अगस्‍त की चियरायी में चिखो, लिखो लिखो..

7 comments:

  1. गज्ज़ब !

    स्कूली दिनों की एक तुकबंदी याद आई शीर्षक था "चार का बड़ा महत्त्व है"

    बस में सीट का,
    परीक्षा मे चीट का
    कपडे में छींट का
    सनीमा में गीत का

    बड़ा महत्त्व है.

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    1. इसका एगो नवका, पौड़कास्‍टी बर्सन, लिक्‍खो.. सपना में सियाल लउके, त ओकरा पे चइली बरसाते हुए, ठाड़ा में, झाड़ा में, आड़ा में, लिक्‍खो..

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  2. लिखने वालों के प्रति ऐसा गुस्सा सोभा नहीं देता.

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    1. सोभवा कह रही थी उसको भी नहीं देता.

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  3. पन लिखना जलूरी है।

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  4. लिखो कि बगैर लिखे जीवन मुमकिन नहीं

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