Thursday, August 8, 2013

रात बाकी का ठेका

फोटो: https://www.facebook.com/nirmal.poddar.7










खूब खटय्या खूब नचय्या
मचर-फचर फींच फिंचय्या
ताथा ताथा ताथा थइय्या 
नीला पीला लाल गझीला
हांक सवारी भांक सवारी
कल्‍टन पल्‍टन भूल-भटक्‍कन
बोतल शीशी पुड़ि‍या ढक्‍कन
पंजा अड़चन सीढ़ी सड़कन
रात का नक्‍शा खाली बक्‍सा
मटकी छुरा गांठ धतूरा
रंग सारंगी रात नारंगी
दम बरसाती बेदम नाली
बंधे हाथ की बेढ़ंग ताली
आंखें जाली कितबियन खाली
ले-ले ले-ले हाली हाली.

2 comments:

  1. अत्यन्त हर्ष के साथ सूचित कर रही हूँ कि
    आपकी इस बेहतरीन रचना की चर्चा शुक्रवार 09-08-2013 के .....मेरे लिए ईद का मतलब ग़ालिब का यह शेर होता है :चर्चा मंच 1332 .... पर भी होगी!
    सादर...!

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  2. बंधे हाथ की बेढ़ंग ताली और ऐसे कितने विम्ब व प्रयोग!
    बहुत सुन्दर!

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