Thursday, August 22, 2013

पुरबिया फुटानीबाज का थकाइल गीत

थक जाओ भक्‍क जाओ, ठहरी गाड़ी में डोलते, पटरी-उतरी की झांक लो, मुट्ठा भर कसाईंन फांक लो, सोये रस्‍तों की हांक, बांधे डैनों की उड़ आओ, उटूक उटूक उड़ूक. छुक-छुक-छुक धुक-धड़क-धुक का टेम्‍परेचर जंचाओ, ताको ताको, देखो, उंगलियों में कैसे बाल उगते हैं, नज़रों पर चढ़ती खाल, भाषा के कंगाल में गाओ, वही तीन के तेरह- मइया गे मइया- का बैलेंस गिनाओ, सोमारो बो के बंजारे में दुखियारी का पंचांग पढ़ आओ, ग्‍वातेमाला की ढीठ पर अमरीकी पीठ, हुलु-हुलु, चढ़ जाओ, हुर्र-हुर्र की लजाइल भइंसी दिये-लिये कादो हिचिक नहाओ, ढिमिलाये पसर जाओ. पक जाओ छक जाओ, अंड़से में उठिंग, उठिंगे में चौंक जाओ. कनिया के मोह में चिचियाने लगो, भागती रेल की छत पर खुद को भगाने, खिड़की से कूदकर गुमटी की गली में गारी गुलो, दनदनाने, चोरी के झोले का पाव भर प्‍याज सजाने, कनिया के लिए अंगुल भर रंग की रंगाई रंगाने, राखरंग जुलफी सजाने, फटीयर पजामा का गांठ सझुराने, झुलसी के जीवन के लतखोर जंगखोर ज़माना में बस मिनिट भर को, बाबू, महक जाओ.

4 comments:

  1. पुरबिया फुटानीबाज का अवसादगीत के बाद पढ़ा ये थकाइल गीत थक जाओ से महक जाओ तक.
    वाह!

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  2. सुखी कैसे हों की तकलीफ़देह पड़ताल में जुटे आप। बहुत तकलीफ उठा रहे हैं, कुछ पवाया?

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    1. आधा किलो पियाज़ चोरा के डेरा लउटे हैं, नीक?

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