Friday, September 6, 2013

हे जी मिस्‍टर अड़े, खड़े..

पड़े मरे खड़े-खड़े ओरे अरे
हटो झुको परे फुटो हरे अरे
किधर चढ़े किससे लड़े होरे
कहंवा ले आये हैं जी अरे बड़े?

सटो सुटो कटो पिटो जरे जरे
हिलो खिलो हुआं मिलो भरे भरे?
अरे तोरे ओरे तेरे सरे सरे
खरे खरे परे परे अरे ओरे?
जीयरा बहिराइये खलिहे अड़े अड़े?
संडे ले मिले थे मंडो को
जी भेंटाइयेगा अइसहीं जड़े जड़े?

धत तेरे की धुत तिरी की
पटाइल मुरचाइल सड़े सड़े?
पांजा लराइयेगा जंगरा ले
जाइयेगा? पाइप ले चहड़ के
रोशनदानी में आइयेगा? गुडे मुड़े
तुड़े चिढ़े ओड़े पोड़े, आच्‍छा लागा
मीठा जागा? इनके खाट्टा उनके तीता?
होड़े हुंड़े तोंड़े टुंड़े मुड़े मुड़े हड़े हाड़े?

(एक पुराना पोस्‍ट था, उस पर नज़र गई, इच्‍छा की लतर चढ़ी, झोंक में ऐसे ही, झोंकाये, पिले पड़े, हड़े?)

2 comments:

  1. काहे इत्ते रिसियाये हो
    ये लो खाओ दही बड़े !

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  2. झोंक में जो हो जाए सब भला!

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