Tuesday, September 3, 2013

झर-झर झर रहा है झरिया..

foto: daniel berehulak
अब ज़रा इस फोटो को देखिए, धनबाद जिले के एक ब्‍लॉक झरिया का है, डैनियल बेरहुलक के कैमरे की कारस्‍तानी है, मगर अब उनकी से निकलकर हम अपनी कारस्‍तानियों में आ जायें. कवि केके ने जैसा कहीं कहा है, मूरख पोथी बांच रहा है राज करे बलवाई / क़त्‍ल-ओ-गारत करने वाला कहता खुद को भाई / दर्जी कपड़े फाड़ रहे हैं कान काटते नाई / कैसा देश दिया है हमको हरिशंकर परसाईं! तो जैसा दीख रहा है विकास का विस्‍तारवाद इस ललियाहीं लैंडस्‍कैप की पीली, चोटखायी इमारतों में यहां और वहां झूलते बिजली के लट्टुओं व छड़ों की शक्‍ल में पहुंच गया है, पोथी बांचने वाले मूरख गो अभी भले न पहुंचें हों, दर्जी और नाई के पीछे रफ़्ता-रफ़्ता वे भी पहुंच ही जायेंगे. अन्‍यत्र एक अन्‍य कवि, एससी ने जैसे कहा ही है, कल्‍चर की खुजली बढ़ी जग में फैली खाज / जिया खुजावन चाहता सतगुरु रखियो लाज. तो कविस्‍वर के संदर्भ को लात लगाते हुए मैं मीठे सोच पा रहा हूं कि लाज रखने, या हरने, जल्‍दी ही इन मनोहारी, उदासिल रंगों को पूरने झरिये में झरता, कोई बाबा भी पहुंचेगा ही. गिट्टी और कबाड़ हिला कर, दायें से खींच, बायें किसी कोने पहुंचाकर, जगह और गरीब का धन निकालकर, तम्‍बू-तिरपाल सजेगा, बाबा की अगवानी को भागे-भागे कुछ स्‍थानीय गुंडे, व धनबाद से आयातित चंद राजनीतिक पंडे, बाबा की चरण-धूलि लेंगे, परमार्थ में, धर्मार्थ में, स्‍थानिक कल्‍चर को कृतार्थ करेंगे. आजू-बाजू गाय और भैंसों का दुहन इनिशियेट होगा. दुहे जा सकने वाले लोगों का भी फिर प्रॉपर कैटेगेराइज़ेशन हो सकेगा.

एक तिलकुट, पिटी स्‍थली के विकास के साथ ही कितनी संभावनाएं उमगने, कलपने लगती हैं. मकानों का पीला देखिए, उसे पीलिया रोग की तरह मत देखिए. वह देखने के लिए मैं नीचे दायें की दुकान में सिगरेट खरीदने पहुंचा ही हुआ हूं. आपको दिख नहीं रहा तो जाकर अपनी आंख का इलाज़ कराइये, झरिया के झल्‍लन विकास पर सवाल मत उड़ाइये.. 

3 comments:

  1. झरिया के भूले हुए से दूर, वाशिंगटन के डीसी में, पोथी बंचाई के विकास की यह एक अन्‍य छवि है: http://www.npr.org/2013/09/01/217211315/with-modern-makeovers-americas-libraries-are-branching-out

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  2. झरिया के झरते बिल्डिंग ब्लॉक और हमारी नजरों के ठीक बीच में मंच पर दो ठो ड्रम काहे रखा है? पेट्रोल का डिस्प्ले है क्या?

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    1. मंच पर रक्‍खा है और आग के सामान है, तो स्‍वाभाविक है आशा और राम के बापू की जगह आरक्षित करके रखी गई है, मने एगो बात कह रहे हैं. बाइक व मोटर टंकी आपूर्ति वाला इतना मटिरियल गरीबन के बीच का करेगा? या हो सकता है स्‍मगलिंग किया हुआ जल हो (आप बस अपना हाथ बचाके रखियेगा, झरिया वालों का कवनो भरोसा नहीं, किसी का किसीयो में अझुराते रहते हैं)?

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