ये जो इतना इतना है
और उसके बाद उस पर जोड़कर
कुछ इतना, रात को सारे उतनों के
हिसाब के नीचे खड़े चुप की खामोशी
में फिर दिखता है क्या कितना.
***
स्टीवन पिंकर और पैरी एंडरसन
कापुचिन्स्की और काबोमावा और
शरण शर्मा, अरुंधति, अंतोनियोनी
अचेबे, अनजान और अरागान इतनी
दुनिया में कितनी गुफ्तगुएं हैं, और
सब गुफ्तगुओं के बाद के सन्नाटे में
आदमी फिर अपने एकांत में
फुसफुसाता है खुद से चुपचाप
कौन गु- फ्- त- गू.
बिना शीर्षक...
ReplyDeleteकितने ही शीर्षक... कितने ही सन्नाटे...
सब समेटे हुए...!!!