Friday, April 24, 2015
मि.. मिस.. मिस्सिंग..
चलिये, एक हानी, हानी नहीं कहानी, येहू संभालिए.. धीमे-धीमे बांचियेगा, आंखों को गड़ जायेगा फिर हमसे शिकायत मती कीजियेगा..
2 comments:
अनूप शुक्ल
April 25, 2015 at 7:07 AM
हर इन्सान का कुछ न कुछ हेराया हुआ है।
बहुत अच्छे स्केच हैं। वाह।
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अनुपमा पाठक
May 8, 2015 at 7:49 PM
वाह!
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हर इन्सान का कुछ न कुछ हेराया हुआ है।
ReplyDeleteबहुत अच्छे स्केच हैं। वाह।
वाह!
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