Saturday, April 25, 2015
बच्चा बड़ा होकर..
माथे में लंबे वाक्य, या कहें पैरा, घुस काहे नहीं रहे? एक और डेढ़ पंक्तियों के थॉट बलून में ढेर हुए जा रहे हैं. मैं भी वही हो रहा हूं. ढेर. ओ लंबे पैराओं, कहां लुकाये हुए हो.. फिलहाल, फिर, वही, संभालिए:
1 comment:
कमल
April 30, 2015 at 10:24 AM
अच्छी कृति है
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अच्छी कृति है
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