Wednesday, April 15, 2015

दिल दिया दरद लिया..

सिनेमा पर फुलकारियों की यह ज़रा मुरीदी दर्द में बही कुछ अपेक्षाकृत लम्‍बी कथा है..

एक बानगी लीजिये:


यह टेढ़े से छोड़ा गया कुछ पीछे का तीर है, इससे पहले का एक देखें: 


सुर और सुरूर की एक बानगी मिली होगी, नहीं मिली तो मुहब्‍बत की एक जंजीर यह भी लीजिये. बस ख़याल रहे, धीरे-धीरे लिपटियेगा..


कुल पैनलों की संख्‍या एक सौ पैंतालीस है, सबको यहां सजाना संभव नहीं. मन में दिलचस्‍पी गोते खाती हो, तो फेसबुक पर इस सिनेमाई चित्रकथा का तार यहां जुड़ा है.




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