Thursday, March 10, 2016

हमारा कोई सानी है ?


हिन्‍दी के अखबार और मास्‍टर आपको जाने काम की क्‍या-क्‍या चीज़ें बतायेंगे, ऐसे और शहर के वैसे दूसरे ढेरों सवाल होंगे, जिनका उनके पास कोई जवाब न होगा. कायदे से सवाल भी न होगा. होने को उनके पास सिर्फ़ उनकी नौकरी और बताकर दांत चियारने और गोड़ हिलाने को अख़बार, और अपनी सर्कुलेशन संख्‍या होगी.

कठवत में सानी है?
बल्‍टे में पानी, है?
चियारने को दांत है?
खटने को जांत?
खाने को चूरा है?
जीबन अधूरा है.

यह एक किताब है, पतंजलि के योग सूत्र की जीवनी. अच्‍छा होता हिन्‍दी में भी होती, मगर हिन्‍दी के ज्ञान-संचयन में ऐसे टाईटल्‍स जुड़ने लगें तो हिन्‍दी के मास्‍टर सब फिर किस विषय पर अपना ज्ञान ठेलकर कहां किससे जुड़ेंगे? हिन्‍दी का समूचा ज्ञान गांव, कस्‍बे और शहर के चौदह विषय हैं, उन्‍हीं से जुड़-जुड़कर धन्‍य होते रहने व होकर जाया होने के लिए है. आगे के कुछ वर्षों तक जब तक वह अपना होना अभी अफोर्ड कर सकता है तब तक के लिए. रिटायरमेंट के बाद हिन्‍दी के मास्‍टरों के लिए तय करना बड़ा मुश्किल होगा कि किस दायरे में अपने को जाया करें.

एक और मज़ेदार बात. ज़रा पतंजलि को नेट पर गूगल करके देखिएगा, तेल, साबुन, बिस्किट पतंजलि के पता नहीं कहां से कैसे प्रोडक्‍ट्स सब की प्राप्ति होगी, योग सूत्र के दर्शन न होंगे. यह भी समाज और सभ्‍यता की अपनी विशिष्‍ट शैली वाली कैटॉलागिंग, और अपने तरह का विकास है. इस पर भी धन्‍य होना बनता है. होइए.  

प्रिंसटन यूनिवर्सिटी ने प्रसिद्ध धर्मग्रंथों का जीवन की एक पूरी श्रृंखला निकाल रखी है, दसेक किताबें छप गई हैं, दसेक और छपेंगी, इसी बहाने अपने जैसे अज्ञानी कुछ कटोरी और चम्‍मच भर ज्ञान पावेंगे, हां, हिन्‍दी ऐसी किताबें नहीं पाएगी वह आप मानकर चलिए, चिरकुट राजनीति के चार सवाल और मास्‍टरी के आठ पोस्‍ट पाएगी और इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में एक गुलज़ारी संझा में अपने को सकारथ करके डकार भरेगी. भरने दीजिए.

हमारा कोई सानी है?
हमसे बड़ी रानी है?
और ऊंची कोई बानी?


औ तुमसे बड़ा अज्ञानी?

2 comments:

  1. आपकी यह उत्कृष्ट प्रस्तुति कल शुक्रवार (11.03.2016) को "एक फौजी की होली " (चर्चा अंक-2278)" पर लिंक की गयी है, कृपया पधारें और अपने विचारों से अवगत करायें, वहाँ पर आपका स्वागत है, धन्यबाद।

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  2. अरे वाह, आज लालाजी को मुँह चिढ़ाने मौक़ा मिल गया मुझे।



    हिंदी में योग दर्शन पर ढेरो किताबें हैं। मैं कितनों की बात करूँ। योग दर्शन के संस्कृत में भी बहुत से भाष्य है, जिनको यहाँपर गिनाया हुआ है, उनके भी हिंदी अनुवादों के पन्ने मैंने पलटे हुए हैं। योग के विषय में पतंजलि से काफ़ी अलग गोरक्ष शतक है, हठयोग प्रदीपिका है, घेरण्ड संहिता है, विज्ञान भैरव तंत्र है, शिवस्वरोदय है। इन में से बहुतों का हिंदी अनुवाद आपको डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया में नहीं मिल सकता है, या archive.org पर भी। और यूनिकोड में भी अलग-अलग जगह काफ़ी कुछ मिल सकता है। डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया की काया पलट गई है, अब वहाँ से सीधे पीडीऐफ की शक्ल में स्कैन की हुई किताब डाउनलोड होती है। और उन ना मिली हुई किताबों में से कौन-सी ऐसी होगी जिसे आप मोतीलाल बनारसीदास, या चौखंबा प्रकाशन या ऐसी संस्कृत की किताबों के ऐक्सपोर्टर-प्रकाशक है जिनकी हिंदी की किताबों से ज़्यादा इंग्लिश की किताबें बिकती हैं।



    दवाइयाँ बनाने से भी पहले, रामदेव का पेशा था संस्कृत पढ़ाना। रामदेव ने भी योग दर्शन का अनुवाद किया हुआ है, और वो अनुवाद वाली किताब केवल उन दुकानों पर मिलती है जिनमें पतंजली कंपनी का डॉक्टर बैठा हो।



    ओशो रजनीश का एक चेला है जो अपने दो बेटों का साथ मिलकर हर दिन 14 घंटे किताबों की स्कैनिंग और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉगनिशन का काम करता है। स्वामी विवेकानंद ने योग दर्शन का अंग्रेज़ी अनुवाद किया था, राजयोग के नाम से। रजनीश ने उस अनुवाद पर दस किताबें बोली, उनका नाम रखा योग- द अल्फा ऐंड द ओमैगा। उन भाषणों का हिंदी अनुवाद इंटरनैट पर यूनिकोड में पड़ा हुआ है। यूनिकोड में लिखे पाठ को ही गूगल खोज सकता है, स्कैन की हुई किताब की पिक्चर को गूगल नहीं पढ़ सकता। योग के आठ अंगों में एक होता है धारणा। विज्ञान भैरव तंत्र में 112 धारणाएँ सिखाई हुई हैं। वो भी इस चेले की वैबसाइट पर मिल जाएगी। फिर गोरक्ष संहिता वग़ैरा में बतलाई गई कुंडलिनी शक्ति पर ओशो की किताब है जिन खोजाँ तिन पाइयाँ। उसका कुछ हिस्सा भी इसकी वैबसाइट पर है।

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