Friday, March 11, 2016

बिछड़े सभी बारी-बारी..

यान ल्‍यांके को कैसे पढ़ें? या कि पढ़ना तो बाद में होगा, मैं नाम ही ग़लत पढ़ (मतलब, लिख) रहा हूं? इन महाराज की किताबों का स्‍वाभाविक है कभी नहीं होगा, मगर होता तो हिन्‍दी में शीर्षक क्‍या होता, 'जनता की सेवा करो', 'लेनिन के बोसे'? पता नहीं, मैं बस 'चार किताबों' पर एक नज़र फिराना चाहता हूं..

ये आकी ऑलिकाइनन बाबू की पहली किताब है, गाज़ि‍याबाद में फिरौती की नहीं, फ‍िनलैंड में 1867 की अकाल की औपन्‍यासिक पुनर्रचना है, इससे शायद बचना ही है..?

ट्राम 83 कहां है? या काल्‍पनिक कॉंगो ही?

रहते-रहते बेचैनी जाने कहां से फुदककर कलेजे का चैन हरने चली आती है, आती कहां से है? शायद यहां से आ रही है, हां, संभवत: यहीं से आ रही होगी?

(लिखवैयों के नाम के उच्‍चारण में भूल-चूक रह गई हो तो छिमा करेंगे, किसी डेलिगेशन का मानित सदस्‍य होकर दक्षिणी कोरिया, या फ्रांस एक मर्तबा पहुंच जाऊं तो ये ग़लतियां क्‍या, खुद मैं भी काफ़ी हद तक सुधर जाऊंगा.)

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