Friday, March 11, 2016

अख़बार में नहीं छपी एक ख़बर की कहानी..

भोर के अंधेरे में गांव की सीमा से बाहर निकले तीन ट्रैक्‍टर थे. ट्रैक्‍टरों की चाल की बेचैनी बताती थी उनके इरादे नेक नहीं थे. कहना मुश्किल है जान गंवाने निकले थे या जान लेने. जान गंवाने और जान लेने से अलग गांव से बाहर की दुनिया के साथ अन्‍य कैसे संबंध हों की ट्रैक्‍टर सवारों के माथे में कोई समझ नहीं थी. गुस्‍से में नहाये थे वो समझ चाहते भी नहीं थे. इतने सालों से समझ रहे हैं समझने की सब सीमाएं अब पीछे छूट गई थीं. समझाने की कोई कोशिश करोगे तुम्‍हारा माथा फोड़ देंगे सिर्फ़ इसकी समझ बची थी. और उसी का सबक, और वही शिक्षा.

ट्रैक्‍टर सड़क पर थे, और अपने में नहीं थे. जैसे सड़क उनका नहीं था. गांव के बाहर कुछ भी उनका अपना नहीं था. यह भी इसी जीवन का सबक था. पहला सवार एक फ़रार फौजी के परिवार से था और उसे फौज और पीछे छूटे वक़्तों से ढेरों सवाल हल करने थे और कोई भी सामने पड़ जाए, उसी से हल करवा लेने के अरमान से वह बाहर निकला था. दूसरा सवार किसानी की तंगी की टेढ़ी कहानी था और यह कहानी कहां से ऐसी टेढ़ी हो गई का किसी ने कभी उसे जवाब समझाने की कोशिश नहीं की थी, और अब जानने की उसे गरज भी नहीं थी, एक गुस्‍सा था जिसे किसी मुकाम तक पहुंचा आने का उसमें बावलापन था, उस गुस्‍से की तीर पर उसने ट्रैक्‍टर की इंजन को कस रखा था. तीसरा सवार शामिल बाजा था और नशे में किसी तूफ़ानी बम की तरह भारी सार्वजनिक तमाशों के बीच फटने को मचल रहा था.

बांग्‍लादेश, वियतनाम, हंगरी, सूरीनाम, किसी भी नाम से तीनों ट्रैक्‍टर सवार बहुत दूर थे. पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश या हरियाणा से भी दूर थे. अपने गांव से बाहर की वे किसी भी दुनिया से बहुत दूर थे. उनकी कोई भाषा नहीं थी. उस भाषा का कोई अख़बार नहीं था. जिस भाषा में वे उबल रहे थे वह इसी देश की हवाओं में था, मगर देश की राजधानी की हवा में वे नहीं थे.

सुबह का सूरज अभी निकला नहीं था. जान-माल की नुकसान से ट्रैक्‍टर सवार अभी भी दूर थे. सुबह की हवाओं में झूमते राजमार्ग पर तेज़ी से गुज़रती गाड़ि‍यों के सवार किसी ट्रैक्‍टर, या तत्‍संबंधी चिंताओं से रूबरू हों, उन लकीरों से टकराने से बचे, अभी बाहर-बाहर भाग रहे थे. अभी कुछ और देर तक उनके लिए सुबह, सड़क और देश सब सुरक्षित बचा हुआ था. थोड़ी देर और तक के लिए.


ट्रैक्‍टर सवार फिर धीरे-धीरे सड़क पर दिखना और उतरना शुरु हुए. 

No comments:

Post a Comment