Saturday, March 12, 2016

निहोरे के सीत्‍कार का एक सुरीला सैरा, एक पैरा..

शीर्षस्‍थों पर पता नहीं कितने समय और तक रार करने के बाद आपने इस शीर्षक पर, 'आ अब लौट चलें', गौर किया है? मैं भी रार करने ही के फेर में निकला था, जाने क्‍यों शीर्षक पर गौर करने लगा. गौर कीजिएगा, पहले आ कहा है. आ आ आ. साफ़-साफ़ दिखता है इसमें अलवावन का न्‍यौता है, विरहजन्‍य सीत्‍कार है, पुकारने की चीख़ है, बुला लेने की मीठी कराह है, प्रिये का नाम उच्‍चार लेने का दर्दीला सुख, संतोष है, बहुत देर तक खिंचे सन्‍नाटे के बाद साइलेंस-ब्रेक का एक थियेट्रिकल जंप है, रांदावू इन्विटेशन है, सेंसुअस प्‍लीडिंग का एक डेज़ायरस कल्‍मि‍नेशन है. आ आ आ. सो स्‍वीट, एंड प्‍लेज़रेबल. मगर ठीक उसके बाद, लौट? हाऊ कम? सो डिटेस्‍टेबल? ऐसे ही लौटाना था, तो बुलाना ही क्‍यों था इन द फर्स्‍ट प्‍लेस? नहीं 'आ' का साइलेंस था, और न होने की सब तक़लीफ़ें थीं, मगर कभी 'आ' की सीत्‍कार सुन ली जाएगी की एक मीठी उम्‍मीद तो थी? या नहीं भी थी तो उसके हो रहने की एक उम्‍मीदबर गुंजाइश तो थी. और कितनी अच्‍छी, सुहानी, सपनीली थी? क्‍या ऐसे ही सपनों के पीछे हम जीवन व्‍यर्थ नहीं करते रहते? 'आ', 'आने वाला कल', 'आगामी अतीत', या 'तुम अले आओ तो फिर कोई बात नहीं, मुलाक़ात नहीं' या ऐसे ही ऊट-पटांगों की टांगों से टांग छुआते हुए हम जितने भी नाकारा बने रहें, हमारा जीवन सकारा नहीं बना रहता? मगर 'आ' के ठीक बाद, 'लौट'? हाऊ मीस्चीवियस, एंड इन सच बैड टेस्‍ट? अबे, मुहब्‍बत, दुलार और उम्‍मीद के सपनीले सुहाने को एकदम दुर्दम्‍य फिल्‍मी बनाने पर आमादा हो? बहुत ज़्यादा नहीं है? और आगे देखिए, 'आ' और 'लौट' के ठीक पीछे 'चलें' की पूंछ, अरे? कहां चलें? इसी चलने के पीछे पहले 'आ' के अलाने का इतना मीठैला निहोरा था? फिर 'आ' के मीठैले की जगह 'श्‍शा श्‍शा!' का कसैला ही हुआ रहता? कहां चलें भाई, यमुना तक भी चलने की जगह बची है, और क्‍यों चलें? कैसे डूब रहे हैं आपको दिखाने के लिए चलें, अरे? ऐसे ही चलाना था तो किसी और को बुलाना था न? हम वैसे ही इतना चले हुए नहीं हैं? आंख है कि बटन? आईंदा से फिर कभी आ आ मत करना? करने की बहुत चाह ही उठे तो पड़ोस के कुत्‍ते को देखकर श्‍शा श्‍शा करना. हद है. किसने ये शीर्षक दिया था? कहां से ऐसा घटियापा कवि कल्पित पा लेते हैं? कहां से ऐसा मैं आ आ पा लेता हूं? जबकि लौट लौट पाया हूं वो पहले से ही पता है.


चलें? कहां, चूल्‍हे में? निकालूं? चप्‍पल?

No comments:

Post a Comment