Thursday, June 23, 2016

टिम की टाइमली पगड‍ंडियां..

टिम पार्क्‍स का कवनो अनुवाद पढ़ा है आपने? ताबुक्‍की, मााकियावेल्‍ली, मोराविया, कल्विनो, कलास्‍सो, इटैलियन में खूब हाथ साफा है जवान ने, और बीच-बीच में अपनो, अंग्रेजी वाली, लिखाइयो, इंडिपेंंडेटली, फरियाते रहे हैं, अंदाजे से बोल रहा हूं, दस किताबें तो होंगी ही, कुच्‍छो पढ़ा है? ताउम्र हिंदी की मनोहर कहानियों से ही लगे, लहटे रहे? हमरे भइया में और आपमें फिर फर्क क्‍या हुआ? हमरे भइया जी जो थे, मने जवानी की उर्वर बेला में जो लहकती हस्‍ती रही उनकी, उनसे कोई, मतलब मैं, ऐसा बेहूदा सवाल करे कि हेंमिग्‍वे के बारे में क्‍या ख़याल है, या हेनरी मिलर के बारे में, तो सड़क पर साइकिलों में लहराकर गुज़रती कॉन्‍वेंट की स्‍कूली लड़कियों के गुच्‍छों से नज़र फेरकर अपनी हमेशा का उदास रहा हूं वाली अदा अक्‍वायर करके पलट सवाल करते, ओंप्रकाश आवारा के बारे में तुम्‍हारी क्‍या राय है? ओंप्रकाश जनार्दन हज्‍जाम के ससुर का उन्‍हें दिया नाम था, और आवारा उनका खुद को दिया तख़ल्‍लुस. लार्सन टुब्रो की एक रॉयल ब्‍लू कवर वाली डायरी थी जिसमें जब वो लड़कियों की ओर न देख रहे हों, या टूटे आईने के आगे अपनी जुल्‍फें न संवार रहे हों, वह गजलनुमा कुछ लिखा करते.

ख़ैर, इटली के उत्‍तर वेरोना में बसे, उम्र में हमसे छौ कदम, और अनुभव में नैचुरली चालीस और चौहत्‍तर कदम आगे, टिम की लहकाइयां इधर-उधर बहुत बहकती रहती हैं. न्‍यूयॉर्क रिव्‍यू आफ बुक्‍स में रह-रहकर वह चमक दिखती रहती है, झुंपाश्री की इटैलियन में लिखी किताब पर उन्‍होंने अच्‍छा महीन उस्‍तरा चलाया था, पिछले दिनों लिखाइयो की दुनिया पर एक अच्‍छी किताब भी आई थी, फिरंगी, फरेबी, जबान, अपनी और परायी पर यहां कुछ दिलचस्‍प बतकहियां हैं, एक, दो, तीन.. फुरसत में नज़र मारियेगा.  

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