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| अरुणाभ सौरभ के फेसबुक वाल से उड़ाई एक पुरानी रंगउड़ी फोटो |
या पत्नी उदास बैठी हो, बिल्ली घर से भाग गई हो, पढ़ने की मेज़ पर गौरये के एक जोड़े ने घोंसला बनाना शुरु कर दिया हो, प्रीति ने मैसेज किया हो कि सोचकर हैरान हूं कि तुम्हारी सोच में इतना ओछापन है, क्या सैक्सुअल ऑब्जेक्ट होना भर ही स्त्री की पात्रता है? स्त्री के मन के आकाश को झांककर कभी समझने की कोशिश की होती तुमने तब जानते कि हमारे संबंध कितने खोखले थे, प्लीज़, मुझे परेशान करना बंद कर दो, और पिछले महीने मैंने जो तेरह सौ तुम्हें दिये थे, उसे लौटाकर मेरे जीवन से बाहर हो जाओ, मैं अपने सेल से तुम्हारा नंबर और लैपटॉप से तुम्हारी मेल आई-डी हमेशा के लिए डिलीट कर रही हूं, गुडबाई एंड बेस्ट ऑफ लक? प्रीति का ऐसा बेसिर-पैर का मैसेज पाकर कैसे मनायें.
नया साल जब कोई गुमनाम डेस्टिनेशन लगता हो, या बचपन के किसी लंगोटिये दोस्त की पहली मर्तबा मिली उस बीवी की तरह जो हिन्दी ऐसे बोलती हो जैसे सूरीनाम या मैसाचुसेट्स से पढ़कर आई हो, या हंसते हुए कैजुयल क्रुयेल्टी में आप आसनसोल से पढ़कर आये हो का नतीजा आपको बिना पढ़े सुना रही हो और उसका चुटकुला समझने से हारे आप घबराकर बाथरुम में जाकर छुप जा रहे हो और दोस्त के दरवाजा बजाने पर शर्मिंदगी में सिर नवाये जल्दी-जल्दी उसे सफाई देने लगते हो कि पत्नी को पीछे अकेली छोड़े तुम कहां-कहां भागे रहते हो और घर लौटकर उसके रोते हुए के आगे जाकर माफ़ी मांग लेने की जगह कैसे पलटकर उस पर बरसने लगते हो, आदमी इस तरह नीच क्यों हो जाता है, बसन्त.. और बसन्त दरवाज़ा बजाना बंद करके दीवार पर मुंह सटाये चुप लगा जाता हो, शर्म के ऐसे कंटीलों में कैसे मनायें.
नहाने की सोचें और कपड़े पहनने लगें, चिल्लाने की सोचें और दोस्त की दी दारु का गिलास हाथ में लेकर दांत चियारने लगें, कविता की किताब फाड़कर खिड़की से फेंक दें की सोचें और बजाय उसे हाथ में लेकर मुदितभाव पढ़ने का अभिनय खेलने लगें, दोनों आंखों पर हथेली बांधे सांस रोके चुप रहने की सोचें और बजाय फेसबुक पर हाथ-गोड़ छोड़ते लहलहाते खेत की तस्वीर बनने लगें, ऐसी मुंहजलाइयों में कैसे मनायें, नया साल..

प्रीति ने मैसेज किया हो कि सोचकर हैरान हूं कि तुम्हारी सोच में इतना ओछापन है, क्या सैक्सुअल ऑब्जेक्ट होना भर ही स्त्री की पात्रता है? स्त्री के मन के आकाश को झांककर कभी समझने की कोशिश की होती तुमने तब जानते कि हमारे संबंध कितने खोखले थे, प्लीज़, मुझे परेशान करना बंद कर दो, और पिछले महीने मैंने जो तेरह सौ तुम्हें दिये थे, उसे लौटाकर मेरे जीवन से बाहर हो जाओ, मैं अपने सेल से तुम्हारा नंबर और लैपटॉप से तुम्हारी मेल आई-डी हमेशा के लिए डिलीट कर रही हूं, गुडबाई एंड बेस्ट ऑफ लक.
ReplyDeleteHappy New Year
तुमको भी मुबारक. मीठा मीठा.
ReplyDeleteसब भलके लोगों को नवका साल मुबारक. बदनाम, छेदाम, चिनिया बदाम, मोहन, गोपाल, सैलेन्दर, अनिर्वान, गुमनाम, सैतान की जान लोगों को भी.
ReplyDeleteaapko bhi!
ReplyDeleteआपकी भी जय हो, महाराज.
Deleteतस्वीर के बीच में रेणु लग रहे हैं, बांकी दो कौन हैं?
ReplyDeleteनया साल शुभ हो!
बाईं ओर राजकमल चौधरी, दायें सर्वेश्वर दयाल सक्सेना. बकिया, आपौ को साल मुबारक.
Deleteहे रक्तवर्णक्रांति के ध्वजवाहक....
ReplyDeleteसर्दी की ठिठुरन और रम की गर्मी के बीच झूलते हुए,
देर रात्रि तक महानगर में नीआन की चमचाम्महट से फिसलन भरे रास्तों से
में कोहरे को गरियाते हुए, झोला अपना संभाल कर सुरती रगड़ते रगड़ते
दो तीन मोटी गाली बगल में खड़ी हिलती हुई गाडी से आती हुई सिसकियों को देते हुए... मफलर को दुबारे कान में लपेटे हुए खांसते खान्सियाते जा ही रहे थे, सोचने को बहुत था, पर चिंता थी की वो तेरह सौ रुए की व्यवस्था किसी परकार हो कि ऊ नाम और लिंक वगैरह उस सनकी प्रेमिका के मोबाइल वगैरह से डिलीट हो सके जो की तेरह सौ रूपये के चक्कर में रहन रखे हुए हैं...
आपके, आपके पतनशील पात्रों को बधाई हो, तेरह को भूल कर पन्द्रह की आदत पहले चेक काटने के साथ पड़े.... जय रामजी की..