दोनों पड़ोसी थे. तम्हाणे वाले लॉट में कभी साथ-साथ बैडमिंटन भी खेला था. कश्मीरियों के यहां चोरी हुई और पुलिसिया पूछताछ के समय फिर टकराये तो दोनों को ही ताज़्ज़ुब हुआ कि ऐसी देह के साथ कैसे कभी बैडमिंटन खेलते थे. तीन दिन तक फिर पुलिस की ओर से कोई अता-पता नहीं हुआ तो दूसरे को चिन्ता हुई कि कहीं ऐसा न हो बैठे-बिठाये उसने किसी फटे में पैर फंसा लिया हो. चिन्ता में दूसरे ने दस तरह की परेशान करनेवाली स्थितियां सोचीं, और ग्यारहवें का सुराग लेने शाम को पहले के दरवाज़े पर पहुंचा. दो बार दरवाज़े की घंटी बजा चुकने पर फिर विचार करना शुरु किया कि कहूंगा क्या कि क्यों आया हूं. पुलिस के बारे में इस तरह खुले में जिज्ञासा करना उचित होगा? नहीं ही होगा, मगर तब तक दरवाज़े की झांक से निकलकर पहला सामने था.
दूसरे को तब और ज़्यादा चिन्ता हुई जब पहले के चेहरे पर सवालिया व संकोच के संकुचित भाव तो दिखे मगर पुलिस से पैदा हो रही परेशानी की उसमें कहीं उपस्थिति नहीं थी.
-- सब ठीक तो है ?
-- हां, हां.. बस गरमी लगता है थोड़ी बढ़ गई है.. मगर वो तो बढ़ना ही था..
-- फिर?
-- फिर?.. अरे हां, घर में आज मुर्गा मशरुम बन रहा था, सोचा तुमको भी बुला लें!
-- मुर्गा है या मुर्गी?
-- आं?.. मालूम नहीं, मंजु तो हमेशा चिकन बोलकर ही लाती है, मुर्गी मरेगी तो फिर अंडे कहां से आयेंगे?
-- मैं तो अंडे खाता नहीं..
-- मुर्गा तो खाते हो न? एक ही बात है.. मैं तो मंजु जो भी सामने रख दे, बिना कहानी बनाये चुपचाप प्रसाद समझकर ग्रहण कर लेता हूं.
-- चिकन मशरुम और प्रसाद में लेकिन फरक है.
-- हां, वो तो है, मगर बीस साल की शादी में चिकचिक न हो तो आदमी सबकुछ प्रेम के प्रसाद की तरह ही एक्सेप्ट करने लगता है.
-- टेस्ट में कैसा लगता है लेकिन?
-- प्रसाद? प्रसाद की पूछ रहे हो?
-- नहीं, मुरगी.. या मुरगा, जो भी.. और मशरुम? पता नहीं क्या है आजकल सबकुछ दिमाग भूलने लगा है.
-- (हंसते हुए) अरे तो.. मुंह में डालोगे फिर याद आ जायेगा.. अब इस उमर में आकर थोड़ा बहुत भूलना तो सबके साथ लग ही जाता है. कभी मैं ही आईने के सामने खड़ा रहता हूं, फिर समझ नहीं आता क्यों खड़ा हूं, कुछ देर बाद मंजु आवाज़ लगाती है कि बन गई दाढ़ी, तब जाकर होश आता है..
-- नहीं, दाढ़ी वाला तो मुझे होश रहता है.. हां, कभी-कभी ये ज़रूर होता है कि..
-- (अचानक एकदम से एक्साइट होते हुए) और वो भी तो होता है!
-- वो भी? समझा नहीं..
-- (आंखों में आंख डालकर राज़दारी से) अरे वही.. द एलिमेंटरी पार्ट ऑफ मैरेज! इन द बेड.. इन द नैचुरल स्टेट.. उसके बाद माइंड कंप्लीटली ब्लैंक.. (फुसफुसाकर) दूसरी पार्टी जब हल्ला मचाना शुरू करती है कि हो क्या रहा है तब जाकर साला होश आता है..
-- (बहुत अम्यूज़्ड नहीं) तो मुझको सचमुच आना होगा?
-- कहां?
-- तुम्हारे घर और कहां?
-- क्यों, पुलिस मेरे यहां आ रही है?

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