Wednesday, April 15, 2015
याद है फलसई?..
एक छोटी-सी कथा यह भी है, लिखी प्रत्यक्षा सिन्हा की है, कलाकर्म से उसकी अनुभूतियों को तीव्र और सघनतकर करने की सुबुद्धि मुझ होनहार की है. यह भी छह पैनलों में कही गई कथा है.
फेसबुक पर इस पृष्ठधृष्ठ का लिंक
यह
रहा.
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