कितना तो हाथ-पैर
फेंका, मुंह के बाद कान और आंख कहां-कहां से नहीं हूं-हां-हें-हौ की, ये और वो जोर
लगाया, और कितना-कितना लगाया, कांख-कांख के बेदम हुई, मगर नहीं होना था सो नहीं ही
हुई. पैदा. सच्चाई यही है. कितनी गंदी है. किताबों में जो भी लिक्खा हो, जीवन
में जो लिखकर आता है अंतत: आप छाती पर उसी को टांगकर जीते हो, एंड अगेन, दैट्स अ
फैक्ट.
आप जो रोज़-रोज़ इधर
की टूंगते और उधर को धींगते, कचर और मचर और सपरकर जी रहे हैं वो क्या समझेंगे
मुझ, मेरे नहीं होने की तक़लीफ़. कि हूं, और नहीं हूं. विचारों में हूं लेकिन
भौतीकली, डंडी लेकर टटोलने निकलिए, कहीं मेरा ठिकाना नहीं पाइयेगा. जो ठिकाना होता
तो पाते, इजंट इट?
पंख होते तो उड़जाती रे, उडंट आई?
कितना तो मन करता है,
कितना कितना कितना तो मन करता है कि कोई सिंघाड़े का फूल मेरे नाक से छुआकर पूछे
कि बोल, बबुनी, किसका फूल है, और मैं बबुनियाई उमग में चहकी जवाब देती.. या मन के
अंधियारों के सब किनारों-छोरों को लांघ, खुले गले से पद्मा तलवलकर का राग केदार
गाकर, रंजी फुआ से पहले स्वयं खुद को लाजवाब करती, और फिर हाथ झटककर, ओह, कैसी तो
प्रसन्न-वेदना में बोलती, आवाज़ की इस महक को पहचानते हैं, बताइये, बताइये?
कितना तो चलना था,
दौड़कर कहां-कहां पहुंचना था, एक लड़की की जान को कितनी-कितनी तो लड़कियों की ज़िन्दगियां
जी लेनी थी, मगर कहां से जीती, क्योंकि जीने के पहले तो होना होता है, और मैं
कहां से हो लेती जबकि मैं सिर्फ़ ख़यालों में थी. ओह, कितना तो दु:ख था मेरे भीतर,
जबकि वह मेरा, मेरा समूचे तौर पर था भी नहीं. ओह.
कितने समय से सुन
रही हूं कि लड़की आ रही है, आ रही है, आ गई, उधर बायें देखो, वह रही खड़ी..! इतने लोग और कितनी बातें, मगर असल बात तो लड़की
ही जानती है कि वह आई है या नहीं. मुझसे पूछिये न कि मैं आई हूं या नहीं. खुद से
पूछ-पूछकर मैं पक चुकी होऊंगी जब मैंने लुचिया से पूछा, बताओ न, दीदी, मैं आई हूं
या नहीं, पिलीच?
दीदी हमारी असल
पहुंची हुई दीदी ठहरीं, सिगरेट के धुओं में अपनी उदासियां लुकाती बोलीं, पुच्ची,
आने के बारे में क्या बताऊं, मैं तो जा चुकी हूं, मेरी दुलारी लइकीत्ता?
सारा बैकवेल बताएगी,
मगर कहां, उनको अपने अस्तित्ववाद के प्रोमोशन से फुरसत निकले जब ना.. सिंगल लइकिन
सब बतायेगी, मगर उहो सब तो अपने प्रमाणवाद में अझुराई हुई हैं, नहीं हैं? लड़ाकिन लइकिन सब बतायेगी, कौन बताएगा, बोलिए न..
(बाकी है)

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