इस संझा मैं आजिज़ आया
सड़क मुसाफ़िर ठेला रेला
औने पौने रौने बौने
धूल धक्कड़ भटक घुमक्कड़
रें रें पें पें हें हें हें हें
अबे चुप लटक्कड़ दायें बढ़क्कड़
मुंह लटकाये मैं खिसियाया
भइय्या आया बहुत मैं आजिज़ आया
आजिज़ तेरी हट धनक्कड़
आया आया कितना शरमाया
रोज़ बचाके सिर टकराके
पर आज तो अपने
आजिज़
से भी मैं आजिज़ आया.

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