Wednesday, March 9, 2016
ये बातें.. हां हां, बातें..
कितनी बतकहियां सुनोगे?
मन कभी भरता है, धन? पूरा होता है कभी, समय?
पढ़ते हो कभी कि बस सारे उड़ते ही रहते हो.. हां हां हां?
उड़ो उड़ो उड़ो, या फिर चलो, पढ़ो..
अब पढ़ो भी,
बतकहियां
ही तो हैं.. ?
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