अज़दक
Friday, October 15, 2021

रात ने क्‍या-क्‍या ख्‍़वाब दिखाये..

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ओरहान पामुक को बिना पलटते मैं लगातार अच्‍छे पांच सौ पेज़ी भरकम उपन्‍यास की सोच रहा हूं। अब थोड़ा समय हुआ कि पलट कर , बार-बार इस और उस तरह स...
Wednesday, September 22, 2021

उम्‍मीदबर आदमी

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अच्‍छी किताबें हाथ नहीं आतीं। उम्‍मीद और सपनों के बीस तहखाने खंगालतें , आंखों पर पानी छींटते , ड्रॉप्‍स गिराते तीस किताबों के भंवर में आप पू...
Friday, September 10, 2021

दोपहर

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  चलते-चलते गुम जाऊंगा आगे कहीं फिर दूर नज़र आऊंगा सिर नवाये हैरत में हिसाब करता संगीत का , मीत का सुनसान मौत और संगीन समय मुट्ठी में भींचे...
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